बिछड़न

“सुकुन सा महसूस हुआ था उस दिन मुझे,

जिस दिन वह बोली थी मिलने आयेगी जरूर,

जिस दिन वक्त से मैंने पुछा, क्या था उसका कसूर; तो समझ में आया उसका मुझसे मिलन ही कुछ आधा-अधूरा था,

कंबख्त वक्त ने उसकी राह न देंखी, के ले गया वह उसे मेरे नसीब से छुडाकर,

बोली थी, डोली में सजधजकर आयेगी वह मेरे घर जरूर,

लेकीन, वक्त ने हि कुछ पल ऐसे लिखे थें मेरे नसीब में कि; बिच में “बिछड़न” आ बैठी।”
#meVinayak पाहुणा©

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s