खेल..

​”प्यार प्यार में खेल खेल गयी वह,

इंतजार के नाम पे सिर्फ दर्द दे गयी वह,

खुद तो बड़ी शातीर निकली; उसकी झूठ़ी आहटों से,

मेरी खामोश नज़रें ढुँढती रही उसे मेरे खयालों के पन्नों में,

लेकिन पन्ने तो सारे फटें निकलें,

जिन्हें जिद्दोजहत उसने आजमाया था।”


#meVinayak पाहुणा©

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बिछड़न

“सुकुन सा महसूस हुआ था उस दिन मुझे,

जिस दिन वह बोली थी मिलने आयेगी जरूर,

जिस दिन वक्त से मैंने पुछा, क्या था उसका कसूर; तो समझ में आया उसका मुझसे मिलन ही कुछ आधा-अधूरा था,

कंबख्त वक्त ने उसकी राह न देंखी, के ले गया वह उसे मेरे नसीब से छुडाकर,

बोली थी, डोली में सजधजकर आयेगी वह मेरे घर जरूर,

लेकीन, वक्त ने हि कुछ पल ऐसे लिखे थें मेरे नसीब में कि; बिच में “बिछड़न” आ बैठी।”
#meVinayak पाहुणा©